माना था जिसे ज़िन्दगी अपनी वो ही दिल तोड़ कर चल दिए
आखों में आंसू होठों पर फरियाद छोड़ गए
अब कैसे जखम भरेंगे इस टूटे दिल के
जब मरहम लगाने वाले ख़ुद जखम दे गए
हमकदम बन के साथ चलने का वादा था उनका
बीच राह में तनहा छोड़ कर दर्द वो दे गए
उम्मीद थी वफा की जिनसे वो ही बेवफा बन गए
मौत ही आके
गले लगा ले तो एक बार आ जाना
क्यों की आखरी इच्छा में आरजू आपकी हम कर गए

4 टिप्पणियां:
आपने बहुत अच्छा लिखा है ।
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहिए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लिए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
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आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है। आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे । हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
ब्लॉग जगत में स्वागत है
अब, आज 27 नवम्बर के दिन
आईये हम सब मिलकर विलाप करें
bahut khub kaha. narayan narayan
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